रौद्र रस – काली : नवरस और देवी शिल्प

रससिद्धांत में शृंगार, हास्य और करुण रस के बाद रौद्र रस का स्वरूप प्रकट किया गया है। इस रस निष्पत्ती का स्थायीभाव क्रोध है। इसलिए जब रुद्र रस अभिव्यक्त किया जाता है, तो उत्साह, आवेग, शीघ्रता, उग्रता और उत्तेजना दिखाई Read More …

करुण रस – त्रिपुरा : नवरस और देवी शिल्प

अब तक हमने शृंगार रसपूर्ण  उमामहेश्वर अलिंगन प्रतिमा और हास्य रस की अभिव्यक्ति करनेवाला सप्तमातृका शिल्पपट देखा है । नवरस और देवी शिल्प की आज तिसरी कड़ी प्रस्तुत है, करुण रस – त्रिपुरा । शोक यह करुण रस का स्थायीभाव है। Read More …